शनिवार, 21 जून 2025

जगमालजी धतरवाल खेतासर के वंशज खट्टू वालों की वंशावली

जगमालजी धतरवाल खेतासर के वंशज खट्टू वालों की वंशावली 
जगमालजी धतरवाल के 2 पुत्र हुए जैयाजी और मगारामजी
(1) जैयाजी का परिवार खेतासर में ही रहा 
(2) मगारामजी विक्रम संवत संवत 1832 को खटटु बालोतरा में बसे 
मगारामजी के 5 पुत्र हुए 1 जोधाजी, 2.कलजी {कला बाबा पुजनीय हैं}, 3.मोडाजी,4.बागाजी, 5 अजबाजी 
नोट : मोडाजी का परिवार पोकरासर,खारावाला में रहता है! जोधाजी, कलजी, बागाजी का परिवार खटटु मैं निवासरत है अजबाजी के परिवार आगे नहीं बढ़ा !
(1)जोधोजी के 1 पुत्र समभेलाजी हुए, 
समभेलाजी के 1 पुत्र धुड़ोजी हुए 
धुड़ोजी के 2 पुत्र हुए 1. रेखोजी 2.दमोजी (END)
रेखोजी के 3 पुत्र हुए 1.पेमोजी, 2. भुरोजी 3.छोगोजी
(1).पेमोजीके4.पुत्रहुएं1.मोठाराम,2.पनाराम,3.हुकमाराम,4.मोहनराम
1. मोटाराम के 2 पुत्र हुए 1.अशोक कुमार 2. बागाराम 
2. पनाराम
3. हुकमाराम के 1.पुत्र प्रकाश 
4. मोहनराम 
(2) भुरोजी के 5. पुत्र हुए1.अनाराम(indianarmy) 2.विरमाराम 3 .राजुराम (indian army) 4.अशोककुमार 5.देवाराम 
1. अनाराम के 1.पुत्र तरुण कुमार हुए 
2. विरमाराम के 1. ललित कुमार हुएं 
3. राजुराम 
4. अशोक कुमार 
5. देवाराम 
(3) छोगोजी 3. पुत्र हुए 1. भीयाराम 2. भीखाराम 3. चुनाराम 
1.भीयाराम के 
2. भीखाराम के 2. पुत्र हुए 1.मोहित व 2. मोन्टु जुड़वां 
3. चुनाराम 


(2). कलाराम जी ( कलजी पुजनीय हैं ) के 1. पुत्र भैराजी हुएं 
1. भैराजी के 2.पुत्र हुएं 1. खेताजी 2. मोटाजी 
1. खेताजी के 3. पुत्र हुए 1. देवाजी [END] 2.भोलाजी 3. भोमाजी 
(2).भोलाजी के 2 पुत्र हुए 1. दुदाराम 2.चेतनराम
1. दुदाराम के 2 पुत्र हुए 1.नरपत 2. मनोहर 
2. चेतन के 1. पुत्र हुएं 1. पवन कुमार 
(3). भोमाजी के 3. पुत्र हुए 1. भीखाराम 2. गंगाराम 3.चिमाराम 
1. भीखाराम के 1 पुत्र पंकज चौधरी 

(3).मोडा जी के 3.पुत्र हूए 1. सतजी 2. कानाजी 3.केहराजी
1.सतजी के कोई सन्तान नहीं हुई 
2.कानाजी के 3.पुत्र हुएं 1.पुराजी 2. जेठाजी 3. नेनाजी
{1}. पुराजी के 3. पुत्र हुए 1. देदाजी 2.पुनमाजी 3.दुर्गाजी
(1). देदाजी के 3. पुत्र हुए 1.घमडाराराम 2.किशनाराम 3.चैनाराम
1.घमडाराम के 2.पुत्र हूए 1. रमेश कुमार 2. मोहन लाल 
1. रमेश कुमार के 1.पुत्र विजय कुमार 
2. मोहन लाल के 1.पुत्र गगनदेव 
2.किशना राम के 2. पुत्र हुए 1. मंगलाराम 2. प्रकाश 
3.चैनाराम के महैन्द्र हुए 
(2).पुनमाजी के 3. पुत्र हुए 1.गोगाराम 2.निम्बाराम 3. बाबुराम 
1. गोगाराम के 2.पुत्र 1.मोहन 2. जगदीश 
2. निम्बाराम के 3. पुत्र हुए 1. रामाराम 2. ओमाराम 3. हरिश 
3.बाबुराम के 2. पुत्र हुए 1. लालाराम 2.अशोक 
(3). दुर्गाजी के 2.पुत्र हुए 1. कवराराम 2. किशनाराम 
1. कवराराम के 1. पुत्र हिमाशू 
2. किशनाराम 
{2} जेठाजी के 5. पुत्र हुए 1. हेमा जी 2. लच्छाराम 3. लखाराम 4.मदाराम 5. सोनाराम 
(1). हेमाजी के कोई सन्तान नहीं हुई !
(2). लच्छारामजी के 5.पुत्र हुए 1. लुम्भाराम 2. मुकेश 3.पुरखाराम 4.भीयाराम 5. जगदीश 
1.लुम्भाराम के 2.पुत्र {1.रामाराम व 2.रमेश जुड़वां}
2.मुकेश के 2. पुत्र हुए 1. सुरैश 2. तेजाराम 
3. पुरखाराम के 2.पुत्र हुए 1.श्रवण कुमार 2. कपिल 
4.भीयाराम के 3. पुत्र हुए 1. रमेश 2. भोमाराम 3. गौतम 
5. जगदीश
(3).लखाराम के 4 . पुत्र हुए 1. गोमाराम 2. उदाराम 3. अचलाराम 4.तगाराम
1.गोमाराम के 1. पुत्र हुआ देविलाल
2. उदाराम
3.अचलाराम के 2. पुत्र 1. गणेश 2. हेमांशु 
4. तगाराम
(4). मदाराम के 2.पुत्र हुए 1.गोगाराम 2. बभुताराम 
1. गोगाराम के 2. पुत्र हुए 1. हरिश 2. भोमाराम 
2. बभुताराम के 2.पुत्र 1. अरविंद 2. राकेश 
(5). सोनाराम के 4. पुत्र हुए 1. जगदीश 2.निम्बाराम 3. अमराराम 4.चैनाराम 
1. जगदीश के 1.पुत्र चुनाराम 
2. निम्बाराम के 1. पुत्र हिम्मत कुमार
3.अमराराम  
4. चैनाराम   
{3} नैनाजी के 1. पुत्र हुए 1. बगताराम 
1. बगताराम के 3. पुत्र हुए 1.जोगाराम 2. करनाराम 3. अचलाराम 
1. जोगाराम के 1. पुत्र पवन कुमार हुए 
2. करनाराम के 2.पुत्र हुए 1. महेंद्र कुमार 2. अरुण 
3. अचलाराम के 1.पुत्र राधेश्याम हुए 
3. केहराजी के 3. पुत्र हुए 1. नन्दरामजी 2. राजुराम 3. आसुराम 
1. नन्दरामजी के 6. पुत्र हुए 1. किरताराम 2. लिखमाराम 3.नारायणराम 4. धर्माराम 5. ठाकराराम 6. सताराम
1. किरताराम के 3. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. हरचन्दराम 3. रामाराम 
1. गोगाराम के 2.पुत्र हुए 1.मानाराम 2. रुखमणराम 
2. हरचन्दराम के 2. पुत्र हुए 1. अशोक कुमार 2. कृष्ण कुमार 
3. रामाराम के 2. पुत्र हुए 1.भगाराम 2. महेंद्र 
2. लिखमाराम के 4. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. कंवराराम 3.बभुताराम 4.भोमाराम
1. गोगाराम के 1.पुत्र हुए 1.जीतु
2. कंवराराम के 1.पुत्र हुएं 1. अरुण कुमार 
3.बभुताराम के 
4. भोमाराम के
3. नारायणराम जी के 1.पुत्र रामाराम हुए 
4. धर्माराम के 1.पुत्र हुए 1. मोहनराम 
5. ठाकराराम के 1. पुत्र हुए 1. गुमानाराम 
1. गुमानाराम के 1.पुत्र हुए धिरज कुमार 
6. सताराम के 2. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. ओमप्रकाश 
3. राजु राम के 3. पुत्र हुए 1. रेखाराम 2. पन्नाराम 3. अमराराम 
1. रेखाराम के 2.पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. विशनाराम 
1. गोगाराम
2. विशनाराम के 2. पुत्र 1.नरेश 2. विक्रम कुमार 
1.गोगाराम के 1. पुत्र हुआ 1. श्रवण कुमार 
2. पन्नाराम (END) 3.अमराराम (END)
3. आसुराम के 2. पुत्र हुए 1. मुलाराम 2. पेमाराम 
1. मुलाराम के 5. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. धन्नाराम 3. सुरताराम 4.रामाराम 5. गुमनाराम 
1. गोगाराम के 1. पुत्र कृष्ण कुमार 
2. धन्नाराम के 1 पुत्र कैलाश 
3. सुरताराम के 
4. रामाराम के
5. गुमानाराम के
2. पेमाराम के 2. पुत्र हुए 1. हरखाराम 2. मंगलाराम 

(4). बाघाजी के 1. पुत्र भैराजी हुए 
(1). भैराजी के 2. पुत्र हुए 1. मुलाजी [ END ]2.कोहलाजी 
2. कोहलाजी के 2. पुत्र हुए 1. पुर्णाराम (END)2. खेराजराम 
2. खेराजराम के 3. पुत्र हुए 1.नारणाराम 2.रामाराम 3.राऊराम 
(5) अजबाजी के 2. पुत्र हुए 1. ताजाजी 2 (मुकनाजी) दोनों के कोई सन्तान नहीं हुई 
नोट: यह परिवार गोगाजी, रामदेव जी, पडासला भोमियाजी , नारसिंह,सतियो जी व दादोसा कलजी की पुजा करतें हैं 

नोट : 1. जैयाजी के परीवार की जानकारी अगले भाग में शामिल की जाएगी !

आरती संग्रह

༺꧁ आरती कलजी धतरवाल की ᭄꧂

जय कलजी जय कलजी जय कलजी देवा !
माता थारी माडुदेवी, पिता थौरा मगजी है !!

जाट कुल मे जन्म लियो, धतरवाल थौरी गोत हैं!
गोगेजीरा सेवक कहिजो, धौरे उपर धाम हैं!!

जय कलजी जय कलजी जय कलजी देवा !
माता थारी माडुदेवी, पिता थौरा मगजी है !!

नारेण चढ़े,नवाद चढ़े और चढ़े खीर चुरमा !
धौळी बधे धजा थौरे ,सेवक करें सेवा !!

जय कलजी जय कलजी जय कलजी देवा !
माता थारी माडुदेवी, पिता थौरा मगजी हैं !!

उपर हांथ गोगेजीरा , पुट गाळा भोमियाजी री हैं !
जुना धाम जुनकी ढ़ाणी,जोतो जागे भारी !!

जय कलजी जय कलजी जय कलजी देवा !
माता थारी माडुदेवी, पिता थौरा मगजी हैं !!

गोगोजी थोने हेला करें, कंवर थोरे द्वार खड़ा !
सुता वो तों जागो सेवक, ढिकाई हालो ताला झडावो !!

जय कलजी जय कलजी जय कलजी देवा !
माता थारी माडुदेवी, पिता थौरा मगजी हैं !!

भाद्रवे री नम रे दिहाड़े , मैलों भरीजे भारी !
दोय कर जोड़ सेवक बोलें शरणो में राखो म्हाने !!

जय कलजी जय कलजी जय कलजी देवा !
माता थारी माडुदेवी, पिता थौरा मगजी हैं !!

लेखक - भीखाराम % श्री भोमाराम जी कलोणी धतरवाल खटटु 

:• धतरवाल वंश कथा •:

-:धतरवाल वंश कथा:-
धरोजी तणी धरा, धातरी गांव बसाय।
धतरवाल वंश उजाले, धरणी नैजा फहराय।१
परणी गंवरी पुनिया, गजोजी की पुत्री सोय।
सुजोजी की पोती, धतरवाल जोड़े होय।२
पुत पदमो प्रचंड, पोतो सरूप वंश बढावे।
सरूप पुत सुजाण, पोतो अजवाण कहावे।३
अजवाण रो पुत मोटो, बाहड़ कहीजै बलवान।
बाहड़ पुत घड़सी हुवै, पोता हरपाल महान।४
हरपाल के पुत हुए, देवोजी दातार।
देवेजी दत दियो, समत तेरा सै री वार।५
देवा पुत धरमो धतरवाल, ऊंट घोड़ा दातरी।
समत तेरासे साल बयासी, दान दियो धातरी।६
धरमे के पुत धनवान, मंगलो राजु नाम।
सिंवरे संग्राम कियो, आय धातरी गाम।७
राजु रण झुझियो, धातरी गाम के मांई।
समत तेरासे कहीजे, साल छियानवे तांई।८
मंगलोजी धातरी सूं चाल के, बसिया कड़ासर गाम।
समत चवदे साल पचीसो, कड़ासर में कियो नाम।९
मंगल पुत कालु मालु भाई, कड़ासर जस पाया।
समत चवदे साल इकावने, कड़ासर निंवत जिमाया।१०
 मालोजी के पुत महान, मोटो राणो नाथु नाम।
नाथुजी री कथा कहूं, जिण किया बड़ोड़ा काम।११

शुक्रवार, 20 जून 2025

कलजी धतरवाल का जीवन परिचय

      
    नाम - कलारामजी [कलजी]
           जन्म - विक्रम संवत 1832 के आस-पास
        पिता - चौधरी मगाराम जी
      मां का नाम - माडुदेवी भाकर
   पत्नी का नाम - यशोदा देवी डऊकिया खट्टू
                         व                   
                भुरी देवी सियाग 
भाईयो के नाम - जौधाजी,मोडाजी,बागाजी, अजबाजी 
  बहनों के नाम - मिरो, हिरो,आखा   
   काका जी का नाम - जैयारामजी खेतासर               
   जाति - जाट गोत्र - धतरवाल
                 गांव - खट्टू
       मुख्य धाम - खट्टू बालोतरा 
गोंगाजी महाराज के परम भक्त जिन्होंने विक्रम संवत 1855के आस-पास ढिकाई मन्दिर के ताले खुलवाए 
 विक्रम संवत 2080 री साल माघ सुधी बारस ने बुधवार दिनांक = 21.02.2024 को कलाराम जी धतरवाल की स्थापना भोलाराम भाई भोमारामजी द्वारा की गईं !

 


           ༺꧁श्री गणेशाय नमः ꧂༻

जय श्री गोगा जी जय श्री भोमिया जी जय श्री कलजी   

      ༺꧁जय श्री दादोसा कलजी꧂༻

विक्रम संवत् 2080 री साल माघ सुधी बारस ने बुधवार दिनांक - 21.02.2024 को कलाराम जी धतरवाल की स्थापना भोलाराम भाई भोमारामजी व दुदाराम, चेतनराम, भिखाराम गंगाराम, चिमाराम, नरपत, मनोहर, पवन व आपरे पुरे परिवार री मौजुदगी में स्थापना करी । स्थापना री टेम मौजुद भोमियाजी सेवक शैरारामजीलौल, रामचन्द जी डऊकिया, जेठाराम जी धतरवाल गोगाजी सेवक रुपाराम धतरवाल पिलानी थान पुजारी, मोडाराम धतरवाल, हिराराम बैनीवाल, हिराराम मैगवाल, नगाराम मैगवाल, खिया बाबा सेवक निम्बाराम धतरवाल व मौजुद लोग सताराम बैनीवाल, आईदान राम बटेर, हरखाराम बैनिवाल, गंगाराम लेगा, खेराजराम जी मेघवाल, देदाराम मेघवाल, भजन गायक प्रकाश खटटु, मुलाराम लोल, व ग्रामवासी मौजूद रहे।

जय श्री गोगाजी  जय श्री भोमियाजी   जय श्री कलजी


          ༺꧁श्री गणेशाय नमः ꧂༻ 


जय श्री गोगाजी  जय श्री कलजी जय श्री भोमिया जी
 
विक्रम संवत 2082 ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष 2 बीज ने बुधवार दिनांक-28.05.2025 को श्री कलारामजी धतरवाल की मुर्ती स्थापना की भोलाराम जी, भोमाराम जी, दुदाराम, भीखाराम,चेतनराम,गंगाराम,चिमाराम, नरपत,मनोहर, पवन, पंकज व कलजी के पुरे परिवार री मोजुदगी में मुर्ती की स्थापना करी !
स्थापना री टेम मौजूद भोमिया सेवक शैराराम/सोनाराम जी लोल, रामचंद्रराम/ मुलाराम जी डऊकिया, आईदानराम/ राजुरामजी बटेर सणपा, पुखराज ब्राम्हण, देदारामजी मेघवाल, खेराजराम मेघवाल, लाधुराम मेघवाल, नगाराम जी मेघवाल, रुपाराम/तुलसाराम जी धतरवाल, मोडाराम/पेमाराम जी धतरवाल, पेमाराम/छैलारामजी प्रजापत, हिराराम/खरथाराम जी बैनिवाल , भोलाराम/भैराराम जी थोरी ,नरसिगारामजी जाखड़, पोलाराम बैनिवाल, मोहनराम जाखड़, अशोक बैनिवाल , भैराराम लोल, खेराजराम/ कोहलाराम जी धतरवाल,भुराराम/रेखारामजी धतरवाल, कुम्भाराम(हुकमाराम)/ पेमाराम जी धतरवाल, नरपत/जेठाराम जी धतरवाल, तगाराम/जैठाराम, व ग्रामवासी मौजूद रहे 




कलारामजी धतरवाल का जीवन परिचय 
राजस्थान की विर भुमि का इतिहास बहुत प्राचीन है अनेक महापुरुषों, सन्तों, शुरमाओ , भक्तों ने समय-समय पर यहां की पावन धन्य धरा पर जन्म लेकर अपने सद्कर्मों से यहां की माटी को गौरवान्वित किया। उन्हीं में एक महान गोगाजी सेवक कलारामजी थे। जिन्होंने अपने जीवन काल में ऐसे कार्य किए जिसके कारण वे जनमानस में लोकप्रिय हो गए ।
ऐसे महान भक्त पुरुष,लोक जीवन के नायक, आस्था के प्रतिक, कलजी धतरवाल का जन्म बाड़मेर जिले के खटटु गांव में विक्रम संवत 1832के आस-पास चौधरी मगाराम जी धतरवाल के घर हुआ। मां का नाम माडुदेवी भाकर ननिहाल खेतासर 
कलजी धतरवाल जब 12 साल के हुए तभी से गोगाजी महाराज की सेवा में लग गए। कई साल बीत जाने के बाद गोगाजी महाराज ने कलजी को मिण धारी रुप में दर्शन दिए और कहा सेवक तेरी भक्ति से मैं प्रसन्न हु जा तु ढीकाई दरबार के दर्शन कर, द्वार तेरे हाथो से खुलवाऊगा।
                  विक्रम संवत 1855 के लगभग कलजी सुबह उठ कर गोगाजी महाराज की जोत कर अपने साथ छोटा ऊंट का बच्छडा लेकर ढिकाई की तरफ रवाना हुए। रास्ते में कलजी को गोगाजी महाराज की छाया आई और चलते चलते ऊंट के बच्छडे के पैर उखड़ गए । रास्ते में कोई अनजान व्यक्ति आया और ऊंट के बच्छडे को अपने साथ ले गया। कलजी वहां से आगे निकल गए और कलजी ढिकाई पहुंचे तो मन्दिर के द्वार बन्द थे। तो कलजी ने पुजारी जी से कहा मन्दिर के दवार खोलो दर्शन करने है । { पुजारी जी ने पुछा - किया देश रा कहिजो मानवी किया देश सु आया }
{कलजी का जवाब - धोराधरती देश मालाणी कहीजे,गांव खटटुसुआया }
{फिर पुजारी ने पुछा - काई थारो नाम कहिजे, किया देव ने धाया}
{कलजी का जवाब - कलो जाट म्हारो नाम कहिजे,धर्मी राजा ने धाया}
जवाब सुन पुजारी जी ने दर्शन करने के लिए मना कर दिया ।और कहा तु चच्छा सेवक हैं तो परीक्षा लेके देखेगे पुजारियों ने ताजणे उठाए और बोले इस ताजणो से तुझे पिटा जाएगा ताजणो की मार झेल पाया तो ही तुझे दर्शन करवाएगे । कलजी ने कहा दर्शन के लिए मझुर है। तभी पुजारियों ने ताजणे उठाए और जैसे ही कलजी की और बढे तो ताजणो के नाग बन गए और पुजारी ज्यो के त्यो ही रहे ? तब कलजी ने गोगाजी महाराज को याद कर परिक्रमा चालु की और तीन परिक्रमा लगने पर मन्दिर के द्वार अपने आप खुल गए चौथी परिक्रमा देने के बाद कलजी ने मन्दिर की और देखा तो अन्दर साक्षात गोंगाजी महाराज खड़े थे कलजी ने प्रणाम किया तब गोगाजी महाराज ने कहा सेवक वरदान माग। तब कलजी ने कहा आपकी इच्छा । गोगाजी महाराज ने कहा कलजी आप पांच भाई हो और तेरी पांचवीं पीढ़ी में पांच भाई होगे तभी से तेरी सम्तकारी देव के रूप में पुजा चालु होगी । बाद में गोंगाजी महाराज अन्तर ध्यान हो गए । फिर वहां मौजूद लोगों से वार्तालाप चुरु हुई। मौजुद लोगों ने कहा आप हम कृपा करें व आपकी इस कला को समेटे, तभी कलजी ने कहा मैं आप जैसा आप मेरे जैसे यह कळा मेरी नहीं है। यह कला कंवरजी की है मैं और आप सभी कंवरजी के चरणों में पड़े तभी इस कला का समाधान होगा। सभी ने मिलकर कंवरजी महाराज को याद किया और माफी मांगी कंवरजी महाराज ने पुजारी जी को माफ किया ?
तभी कलजी ने कहा मालाणी से आने वाले भक्तों के लिए मन्दिर खुला रखें । बाद में कलजी घर आ गये।

जाट धतरवाल वंशावली

धतरवाल वंश की सम्पूर्ण वंशावली 

1. धरोजी धतरवाल (धरोजी का विवाह सुजोजी पुनियां के पुत्र गजोजी की पुत्री गंवरी पुनियां से हुआ, धरोजी ने धातरी गांव बसाया)
2. पदमो जी धतरवाल
3. सरूपो जी धतरवाल
4. सुजांण जी धतरवाल
5. अजवाण जी धतरवाल
6. बाहड़वो जी धतरवाल
7. घड़सी जी धतरवाल (वि.सं. 1295 में धातरी गांव में निवासरत)
8. हरपाल जी धतरवाल
9. देवो जी धतरवाल (वि.सं. 1300 में धातरी गांव में निवासरत)
10. धरमो जी धतरवाल (वि.सं.1382 में धातरी गांव में निवासरत)
11. मंगलो जी धतरवाल (मागीरामजी)(वि.सं. 1425 में कड़ासर गांव में निवासरत)( भाई राजु जी धतरवाल (वि.सं. 1396 को धातरी गांव में झूंझार हुए, स्मारक धातरी गांव में)
12. मालुरामजी धतरवाल(मालोणजी) (वि.सं. 1451 में कड़ासर गांव में निवासरत, भाई- कालुजी)
13. नाथु जी धतरवाल (भाई- मोटोजी, राणोजी)
14. भीखो जी धतरवाल (भाई- कुंभोजी, जेतोजी, खींयोजी, लाडूजी, केहरोजी, फूलोजी) (वि.सं. 1481 में कड़ासर में निवासरत)
15. मुलसी जी धतरवाल (वि.सं. 1541 में कुड़छी गांव में निवासरत)
16. नगाराम जी धतरवाल (जीवनकाल वि.सं 1547-1635, खेतासर गांव में निवासरत)
17. रतनो जी धतरवाल
18. कचरो जी धतरवाल (वि.सं. 1691 को खेतासर के सांई खेड़ा में निवासरत)
19. नाथो जी धतरवाल
20. खींयो जी धतरवाल
21. नेतो जी धतरवाल (वि.सं. 1785 में खेतासर में नेतोजी के पुत्रों जीवणजी व आयोजी ने इनका जीवित पहिया भोज करवाया)
22. जीवण जी धतरवाल (भाई- आयोजी, हीरोजी, मोटोजी) ( भाई आयोजी वि.सं. 1832 को बायतु में बसे)
23. मेहराज जी धतरवाल
24. जगमाल जी धतरवाल(खटटु व खेतासर) (भाई- दुदोजी(खेतासर), भारमलजी(खटटु), श्यामजी(खटटु व दिनगढ़ ))
25. मगाराम जी धतरवाल (भाई- , जैयाजी का परिवार खेतासर में है, )
26. कलाराम जी धतरवाल (दादोसा कलजी पुजनीय है)(भाई- जोधोजी(खटटु),( मोडोजी , का परिवार पोकरासर चौहटन में है),बागोजी(खटटु), अजबोजी खटटु में है 
27. भैराराम जी धतरवाल
28. खेताराम जी धतरवाल (भाई- मोटोजीEND)
29. भोमाराम जी धतरवाल (भाई- देवोजीEND, भोलोजी)
30. भीखाराम जी धतरवाल (भाई- गंगोजी, चिमोजी) खटटु में निवासरत हैं!
31.पकंज चौधरी 

भजन संग्रह

               भजन कलजी धतरवाल                             भजन  (1). कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे ........! कळा कंवरजी थारी!  (2)....