-:धतरवाल वंश कथा:-
धरोजी तणी धरा, धातरी गांव बसाय।
धतरवाल वंश उजाले, धरणी नैजा फहराय।१
परणी गंवरी पुनिया, गजोजी की पुत्री सोय।
सुजोजी की पोती, धतरवाल जोड़े होय।२
पुत पदमो प्रचंड, पोतो सरूप वंश बढावे।
सरूप पुत सुजाण, पोतो अजवाण कहावे।३
अजवाण रो पुत मोटो, बाहड़ कहीजै बलवान।
बाहड़ पुत घड़सी हुवै, पोता हरपाल महान।४
हरपाल के पुत हुए, देवोजी दातार।
देवेजी दत दियो, समत तेरा सै री वार।५
देवा पुत धरमो धतरवाल, ऊंट घोड़ा दातरी।
समत तेरासे साल बयासी, दान दियो धातरी।६
धरमे के पुत धनवान, मंगलो राजु नाम।
सिंवरे संग्राम कियो, आय धातरी गाम।७
राजु रण झुझियो, धातरी गाम के मांई।
समत तेरासे कहीजे, साल छियानवे तांई।८
मंगलोजी धातरी सूं चाल के, बसिया कड़ासर गाम।
समत चवदे साल पचीसो, कड़ासर में कियो नाम।९
मंगल पुत कालु मालु भाई, कड़ासर जस पाया।
समत चवदे साल इकावने, कड़ासर निंवत जिमाया।१०
मालोजी के पुत महान, मोटो राणो नाथु नाम।
नाथुजी री कथा कहूं, जिण किया बड़ोड़ा काम।११