कलजी धतरवाल पुस्तक
1.पीढीनामा (वंशावली)
धतरवाल वंश वंशावली
मगाराम जी धतरवाल के परिवार की सम्पूर्ण वंशावली
2.जीवन परिचय
कलाराम जी धतरवाल के जन्म, बहनों, भाईयों, के बारे में
जन्म से ढिकाई तक का सफर
3. परचे
4.फोटो
5. खेतासर से खट्टू का सफर
6. दर्शन दिए
7. भजन
(1) पीढीनामा
( वंशावली)
धतरवाल वंश की सम्पूर्ण वंशावली
1. धरोजी धतरवाल (धरोजी का विवाह सुजोजी पुनियां के पुत्र गजोजी की पुत्री गंवरी पुनियां से हुआ, धरोजी ने धातरी गांव बसाया)
2. पदमो जी धतरवाल
3. सरूपो जी धतरवाल
4. सुजांण जी धतरवाल
5. अजवाण जी धतरवाल
6. बाहड़वो जी धतरवाल
7. घड़सी जी धतरवाल (वि.सं. 1295 में धातरी गांव में निवासरत)
8. हरपाल जी धतरवाल
9. देवो जी धतरवाल (वि.सं. 1300 में धातरी गांव में निवासरत)
10. धरमो जी धतरवाल (वि.सं.1382 में धातरी गांव में निवासरत)
11. मंगलो जी धतरवाल (मागीरामजी)(वि.सं. 1425 में कड़ासर गांव में निवासरत)( भाई राजु जी धतरवाल (वि.सं. 1396 को धातरी गांव में झूंझार हुए, स्मारक धातरी गांव में)
12. मालुरामजी धतरवाल(मालोणजी) (वि.सं. 1451 में कड़ासर गांव में निवासरत, भाई- कालुजी)
13. नाथु जी धतरवाल (भाई- मोटोजी, राणोजी)
14. भीखो जी धतरवाल (भाई- कुंभोजी, जेतोजी, खींयोजी, लाडूजी, केहरोजी, फूलोजी) (वि.सं. 1481 में कड़ासर में निवासरत)
15. मुलसी जी धतरवाल (वि.सं. 1541 में कुड़छी गांव में निवासरत)
16. नगाराम जी धतरवाल (जीवनकाल वि.सं 1547-1635, खेतासर गांव में निवासरत)
17. रतनो जी धतरवाल
18. कचरो जी धतरवाल (वि.सं. 1691 को खेतासर के सांई खेड़ा में निवासरत)
19. नाथो जी धतरवाल
20. खींयो जी धतरवाल
21. नेतो जी धतरवाल (वि.सं. 1785 में खेतासर में नेतोजी के पुत्रों जीवणजी व आयोजी ने इनका जीवित पहिया भोज करवाया)
22. जीवण जी धतरवाल (भाई- आयोजी, हीरोजी, मोटोजी) ( भाई आयोजी वि.सं. 1832 को बायतु में बसे)
23. मेहराज जी धतरवाल
24. जगमाल जी धतरवाल(खटटु व खेतासर) (भाई- दुदोजी(खेतासर), भारमलजी(खटटु), श्यामजी(खटटु व दिनगढ़ ))
जगमालाराम जी धतरवाल के 4.पुत्र थे(1).अणदोजी (2).जैयारामजी (3).मगारामजी (4).साईराम 2.बैटिया (1) तुलसी (2) धन्न्नी
(1). अणदोजी का परिवार खेतासर में ही रहा!
(2). जैयाराम जी का परीवार खेतासर में ही रहा !
(3). मगाराम जी का परिवार खट्टू में बचा !
(4). साईराम जी का परिवार खेतासर में ही रहा!
मगाराम जी खेतासर से खट्टू 1800 के आसपास आ गए ! साथ में भुराराम जी (मुडेल) प्रजापत आये थे आज भुराराम जी प्रजापत का परिवार खटटु,सिणतरा,आदि गांवों में निवास करतें हैं
मगाराम जी के (5).पुत्र 1 जोधाराम जी,2 कलाराम जी, 3मोडाराम जी 4 बागारामजी 5 अजबारामजी (3).पुत्रीया1. मिरो 2.हिरो 3.आखा
मगाराम जी का विवाह=माडु देवी भाकर के साथ हुआ ससुरजी जयरामजी %श्री भारुरामजी भाकर खेतासर
श्री कलाराम जी धतरवाल के वंश परिचय
पहला विवाह कलाराम जी = यशोदा देवी डऊकिया ससुरजी का नाम - चोन्दाराम % श्री भीयाराम जी डऊकिया खट्टू
दुसरा विवाह = भुरी देवी सियाग ससुरजी का नाम - मन्दरुपाराम % श्री पिथाराम जी सियाग गांव पता नहीं है ! कलाराम के (1) पुत्र भैराराम जी
भैराराम जी का विवाह = जेती देवी डोगियाल सणपा के साथ हुआ भैराराम जी के 4.बेटिया (1)नेनु-भैरारामजी थोरी खट्टू (2)अनु-गुणेशारामजी %श्री करनाराम जी बैनिवाल चान्देसरा (3)मिछरु-खरथारामजी %श्री लुम्भाराम जी बैनिवाल चान्देसरा (4) तुलसी -राजुराम जी बटेर सणपा 2.बैटे (1) खेताराम जी = तिजो देवी बैनिवाल ससुरजी का नाम लुम्भाराम %श्री जोधाराम जी बैनिवाल चान्देसरा(2) मोटाजीEND
खेताराम जी के 3.बेटे (1) देवाराम जी END (2) भोलाराम जी (3)भोमाराम जी
2 . भोलाराम जी=शत्रु देवी बटेर ससुरजी का नाम भियाराम जी बटेर सणपा भोलाराम जी के 2.बेटे (1)दुदाराम =अणसी देवी थोरी ससुरजी का नाम रहिगाराम % श्री देवाराम जी थोरी खटटु
(2)चेतनराम = चुनी देवी सियाग ससुरजी का नाम उमारामजी %श्री भीयाराम जी सियाग सणपा 3.बेटीया (1) हेमी=सिताराम% श्री गंगाराम जी लेगा खट्टू (2)फति=रामाराम% श्री रहिगाराम जी थोरी खट्टू (3)कान्ता = रामाराम% श्री मलाराम जी माचरा भिमरलाई स्टेशन
दुदाराम के 2. बेटे नरपत,व मनोहर 1. बेटी दरीया
चेतनराम के 1. बेटी करिशमा 1.बेटा पवन कुमार
3.भोमाराम जी= धनी देवी जाखड़ ससुरजी का नाम मालाराम % श्री दामाराम जी जाखड़ सेवनियाला ! भोमाराम जी के 3.बेटे (1)भीखाराम= अनिता देवी सारण ससुरजी का नाम तुलसाराम % श्री पुनमाराम जी सारण भुरटिया दक्षिणी मातासर (2) गंगाराम ( 3) चिमाराम 1.बैटी राऊ (रविना)
भीखाराम के 1. बेटी संगीता 1. बेटा पंकज चौधरी
1. भाई जौधा जी धतरवाल के वंश परिचय
(1)जोधोजी के 1 पुत्र समभेलाजी हुए,
समभेलाजी के 1 पुत्र धुड़ोजी हुए
धुड़ोजी के 2 पुत्र हुए 1. रेखोजी 2.दमोजी (END)
रेखोजी के 3 पुत्र हुए 1.पेमोजी, 2. भुरोजी 3.छोगोजी
(1).पेमोजीके4.पुत्रहुएं1.मोठाराम,2.पनाराम,3.हुकमाराम,4.मोहनराम
1. मोटाराम के 2 पुत्र हुए 1.अशोक कुमार 2. बागाराम
2. पनाराम
3. हुकमाराम के 1.पुत्र प्रकाश
4. मोहनराम
(2) भुरोजी के 5. पुत्र हुए1.अनाराम(indianarmy) 2.विरमाराम 3 .राजुराम (indian army) 4.अशोककुमार 5.देवाराम
1. अनाराम के 1.पुत्र तरुण कुमार हुए
2. विरमाराम के 1. ललित कुमार हुएं
3. राजुराम
4. अशोक कुमार
5. देवाराम
2. कलाराम जी वंश परिचय
कलाराम जी ( कलजी पुजनीय हैं ) के 1. पुत्र भैराजी हुएं
1. भैराजी के 2.पुत्र हुएं 1. खेताजी 2. मोटाजी
1. खेताजी के 3. पुत्र हुए 1. देवाजी [END] 2.भोलाजी 3. भोमाजी
(2).भोलाजी के 2 पुत्र हुए 1. दुदाराम 2.चेतनराम
1. दुदाराम के 2 पुत्र हुए 1.नरपत 2. मनोहर
2. चेतन के 1. पुत्र हुएं 1. पवन कुमार
(3). भोमाजी के 3. पुत्र हुए 1. भीखाराम 2. गंगाराम 3.चिमाराम
1. भीखाराम के 1 पुत्र पंकज चौधरी
3.भाई मोडाजी धतरवाल वंश परिचय पोकरासर,खारावाला, मतेका तला
3.मोडा जी के 3.पुत्र हूए 1. सतजी 2. कानाजी 3.केहराजी
1.सतजी के कोई सन्तान नहीं हुई
2.कानाजी के 3.पुत्र हुएं 1.पुराजी 2. जेठाजी 3. नेनाजी
{1}. पुराजी के 3. पुत्र हुए 1. देदाजी 2.पुनमाजी 3.दुर्गाजी
(1). देदाजी के 3. पुत्र हुए 1.घमडाराराम 2.किशनाराम 3.चैनाराम
1.घमडाराम के 2.पुत्र हूए 1. रमेश कुमार 2. मोहन लाल
1. रमेश कुमार के 1.पुत्र विजय कुमार
2. मोहन लाल के 1.पुत्र गगनदेव
2.किशना राम के 2. पुत्र हुए 1. मंगलाराम 2. प्रकाश
3.चैनाराम के महैन्द्र हुए
(2).पुनमाजी के 3. पुत्र हुए 1.गोगाराम 2.निम्बाराम 3. बाबुराम
1. गोगाराम के 2.पुत्र 1.मोहन 2. जगदीश
2. निम्बाराम के 3. पुत्र हुए 1. रामाराम 2. ओमाराम 3. हरिश
3.बाबुराम के 2. पुत्र हुए 1. लालाराम 2.अशोक
(3). दुर्गाजी के 2.पुत्र हुए 1. कवराराम 2. किशनाराम
1. कवराराम के 1. पुत्र हिमाशू
2. किशनाराम
{2} जेठाजी के 5. पुत्र हुए 1. हेमा जी 2. लच्छाराम 3. लखाराम 4.मदाराम 5. सोनाराम
(1). हेमाजी के कोई सन्तान नहीं हुई !
(2). लच्छारामजी के 5.पुत्र हुए 1. लुम्भाराम 2. मुकेश 3.पुरखाराम 4.भीयाराम 5. जगदीश
1.लुम्भाराम के 2.पुत्र {1.रामाराम व 2.रमेश जुड़वां}
2.मुकेश के 2. पुत्र हुए 1. सुरैश 2. तेजाराम
3. पुरखाराम के 2.पुत्र हुए 1.श्रवण कुमार 2. कपिल
4.भीयाराम के 3. पुत्र हुए 1. रमेश 2. भोमाराम 3. गौतम
5. जगदीश
(3).लखाराम के 4 . पुत्र हुए 1. गोमाराम 2. उदाराम 3. अचलाराम 4.तगाराम
1.गोमाराम के 1. पुत्र हुआ देविलाल
2. उदाराम
3.अचलाराम के 2. पुत्र 1. गणेश 2. हेमांशु
4. तगाराम
(4). मदाराम के 2.पुत्र हुए 1.गोगाराम 2. बभुताराम
1. गोगाराम के 2. पुत्र हुए 1. हरिश 2. भोमाराम
2. बभुताराम के 2.पुत्र 1. अरविंद 2. राकेश
(5). सोनाराम के 4. पुत्र हुए 1. जगदीश 2.निम्बाराम 3. अमराराम 4.चैनाराम
1. जगदीश के 1.पुत्र चुनाराम
2. निम्बाराम के 1. पुत्र हिम्मत कुमार
3.अमराराम
4. चैनाराम
{3} नैनाजी के 1. पुत्र हुए 1. बगताराम
1. बगताराम के 3. पुत्र हुए 1.जोगाराम 2. करनाराम 3. अचलाराम
1. जोगाराम के 1. पुत्र पवन कुमार हुए
2. करनाराम के 2.पुत्र हुए 1. महेंद्र कुमार 2. अरुण
3. अचलाराम के 1.पुत्र राधेश्याम हुए
3. केहराजी के 3. पुत्र हुए 1. नन्दरामजी 2. राजुराम 3. आसुराम
1. नन्दरामजी के 6. पुत्र हुए 1. किरताराम 2. लिखमाराम 3.नारायणराम 4. धर्माराम 5. ठाकराराम 6. सताराम
1. किरताराम के 3. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. हरचन्दराम 3. रामाराम
1. गोगाराम के 2.पुत्र हुए 1.मानाराम 2. रुखमणराम
2. हरचन्दराम के 2. पुत्र हुए 1. अशोक कुमार 2. कृष्ण कुमार
3. रामाराम के 2. पुत्र हुए 1.भगाराम 2. महेंद्र
2. लिखमाराम के 4. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. कंवराराम 3.बभुताराम 4.भोमाराम
1. गोगाराम के 1.पुत्र हुए 1.जीतु
2. कंवराराम के 1.पुत्र हुएं 1. अरुण कुमार
3.बभुताराम के
4. भोमाराम के
3. नारायणराम जी के 1.पुत्र रामाराम हुए
4. धर्माराम के 1.पुत्र हुए 1. मोहनराम
5. ठाकराराम के 1. पुत्र हुए 1. गुमानाराम
1. गुमानाराम के 1.पुत्र हुए धिरज कुमार
6. सताराम के 2. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. ओमप्रकाश
3. राजु राम के 3. पुत्र हुए 1. रेखाराम 2. पन्नाराम 3. अमराराम
1. रेखाराम के 2.पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. विशनाराम
1. गोगाराम
2. विशनाराम के 2. पुत्र 1.नरेश 2. विक्रम कुमार
1.गोगाराम के 1. पुत्र हुआ 1. श्रवण कुमार
2. पन्नाराम (END) 3.अमराराम (END)
3. आसुराम के 2. पुत्र हुए 1. मुलाराम 2. पेमाराम
1. मुलाराम के 5. पुत्र हुए 1. गोगाराम 2. धन्नाराम 3. सुरताराम 4.रामाराम 5. गुमनाराम
1. गोगाराम के 1. पुत्र कृष्ण कुमार
2. धन्नाराम के 1 पुत्र कैलाश
3. सुरताराम के
4. रामाराम के
5. गुमानाराम के
2. पेमाराम के 2. पुत्र हुए 1. हरखाराम 2. मंगलाराम
भाई बाघा जी धतरवाल का वंश परिचय
(4). बाघाजी के 1. पुत्र भैराजी हुए
(1). भैराजी के 2. पुत्र हुए 1. मुलाजी [ END ]2.कोहलाजी
2. कोहलाजी के 2. पुत्र हुए 1. पुर्णाराम (END)2. खेराजराम
2. खेराजराम के 3. पुत्र हुए 1.नारणाराम 2.रामाराम 3.राऊराम
भाई अजबाजी धतरवाल वंश परिचय
(5) अजबाजी के 2. पुत्र हुए 1. ताजाजी 2 (मुकनाजी) दोनों के कोई सन्तान नहीं हुई
नोट: यह परिवार गोगाजी, रामदेव जी, पडासला भोमियाजी , नारसिंह,सतियो जी व दादोसा कलजी की पुजा करतें हैं
2. जीवन परिचय
नाम - कलारामजी [कलजी]
जन्म - विक्रम संवत 1832 के आस-पास
पिता - चौधरी मगाराम जी
मां का नाम - माडुदेवी भाकर
पत्नी का नाम - यशोदा देवी डऊकिया खट्टू
व
भुरी देवी सियाग
भाईयो के नाम - जौधाजी,मोडाजी,बागाजी, अजबाजी
बहनों के नाम - मिरो, हिरो,आखा
जाति - जाट गोत्र - धतरवाल
गांव - खट्टू
मुख्य धाम - खट्टू बालोतरा
गोंगाजी महाराज के परम भक्त जिन्होंने विक्रम संवत 1855के आस-पास ढिकाई मन्दिर के ताले खुलवाए
विक्रम संवत 2080 री साल माघ सुधी बारस ने बुधवार दिनांक = 21.02.2024 को कलाराम जी धतरवाल की स्थापना भोलाराम भाई भोमारामजी द्वारा की गईं !
{: कलारामजी धतरवाल का जीवन परिचय :}
राजस्थान की वीर भुमि में अनेक महापुरुषों, सन्तों, शुरमाओ , भक्तों ने समय-समय पर यहां की पावन धन्य धरा पर जन्म लेकर अपने सद्कर्मों से यहां की माटी को गौरवान्वित किया। उन्हीं में एक महान गोगाजी सेवक कलारामजी थे। जिन्होंने अपने जीवन काल में ऐसे कार्य किए जिसके कारण वे जनमानस में लोकप्रिय हो गए ।
ऐसे महान भक्त पुरुष,लोक जीवन के नायक, आस्था के प्रतीक, कलजी धतरवाल का जन्म बाड़मेर जिले के खटटु गांव में विक्रम संवत 1832 के आस-पास चौधरी मगाराम जी धतरवाल के घर हुआ। मां का नाम माडुदेवी भाकर ननिहाल खेतासर ।
कलजी धतरवाल जब 12 साल के हुए। तभी से गोगाजी महाराज की सेवा में लग गए। कई साल बीत जाने के बाद गोगाजी महाराज ने कलजी को मिणधारी रुप में दर्शन दिए और कहा सेवक तेरी भक्ति से मैं प्रसन्न हु जा तु ढीकाई दरबार के दर्शन कर, द्वार तेरे हाथो से खुलवाऊगा।
विक्रम संवत 1855 के लगभग कलजी सुबह उठ कर गोगाजी महाराज की जोत कर अपने साथ छोटा ऊंट का बच्छडा लेकर ढिकाई की तरफ रवाना हुए। रास्ते में कलजी को गोगाजी महाराज की छाया आई और चलते चलते ऊंट के बच्छडे के पैर उखड़ गए । रास्ते में कोई अनजान व्यक्ति आया और ऊंट के बच्छडे को अपने साथ ले गया। कलजी वहां से आगे निकल गए और कलजी ढिकाई पहुंचे तो मन्दिर के द्वार बन्द थे। तो कलजी ने पुजारी जी से कहा मन्दिर के दवार खोलो दर्शन करने है ।
{ पुजारी जी ने पुछा - किया देश रा कहिजो मानवी किया देश सु आया } {कलजी का जवाब - धोराधरती देश मालाणी कहीजे,गांव खटटु सु आया } {फिर पुजारी ने पुछा - काई थारो नाम कहिजे, किया देव ने धाया} {कलजी का जवाब - कलो जाट म्हारो नाम कहिजे,धर्मी राजा ने धाया}
जवाब सुन पुजारी जी ने दर्शन करने के लिए मना कर दिया ।और कहा तु सच्चा सेवक हैं तो परीक्षा लेके देखेगे पुजारियों ने ताजणे उठाए और बोले इस ताजणो से तुझे पिटा जाएगा ताजणो की मार झेल पाया तो ही तुझे दर्शन करवाएगे । कलजी ने कहा दर्शन के लिए मंजूर है। तभी पुजारियों ने ताजणे उठाए और जैसे ही कलजी की और बढे तो ताजणो के नाग बन गए और पुजारी ज्यो के त्यो ही रहे ? तब कलजी ने गोगाजी महाराज को याद कर परिक्रमा चालु की और तीन परिक्रमा लगने पर मन्दिर के द्वार अपने आप खुल गए चौथी परिक्रमा देने के बाद कलजी ने मन्दिर की और देखा तो अन्दर साक्षात गोंगाजी महाराज खड़े थे कलजी ने प्रणाम किया तब गोगाजी महाराज ने कहा सेवक वरदान माग। तब कलजी ने कहा आपकी इच्छा । गोगाजी महाराज ने कहा कलजी आप पांच भाई हो और तेरी पांचवीं पीढ़ी में पांच भाई होगे तभी से तेरी चमत्कारी देव के रूप में पुजा चालु होगी । बाद में गोंगाजी महाराज अन्तर्ध्यान हो गए । फिर वहां मौजूद लोगों से वार्तालाप शुरु हुई। मौजुद लोगों ने कहा आप हम कृपा करें व आपकी इस कला को समेटे, तभी कलजी ने कहा मैं आप जैसा आप मेरे जैसे यह कळा मेरी नहीं है। यह कला कंवरजी की है मैं और आप सभी कंवरजी के चरणों में पड़े तभी इस कला का समाधान होगा। सभी ने मिलकर कंवरजी महाराज को याद किया और माफी मांगी कंवरजी महाराज ने पुजारी जी को माफ किया ?
तभी कलजी ने कहा मालाणी से आने वाले भक्तों के लिए मन्दिर खुला रखें । बाद में कलजी घर आ गये।
आज कलारामजी पुजनीय है।
कलाराम जी धतरवाल की छतरी की स्थापना
विक्रम संवत 2080 री साल माघ सुदी बारस ने बुधवार, दिनांक - 21.02.2024 को कलाराम जी धतरवाल की छतरी की स्थापना की. !
''स्थापना''
༺꧁श्री गणेशाय नमः ꧂༻
जय श्री गोगाजी जय श्री कलजी जय श्री भोमिया जी
विक्रम संवत 2082 ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष 2 बीज ने बुधवार दिनांक-28.05.2025 को श्री कलारामजी धतरवाल की मुर्ती स्थापना की भोलाराम जी, भोमाराम जी, दुदाराम, भीखाराम,चेतनराम,गंगाराम,चिमाराम, नरपत,मनोहर, पवन, पंकज व कलजी के पुरे परिवार री मोजुदगी में मुर्ती की स्थापना करी !
स्थापना री टेम मौजूद भोमिया सेवक शैराराम/सोनाराम जी लोल, रामचंद्रराम/ मुलाराम जी डऊकिया, आईदानराम/ राजुरामजी बटेर सणपा, पुखराज ब्राम्हण,
देदारामजी मेघवाल, खेराजराम मेघवाल, लाधुराम मेघवाल, नगाराम जी मेघवाल, रुपाराम/तुलसाराम जी धतरवाल, मोडाराम/पेमाराम जी धतरवाल, पेमाराम/छैलारामजी प्रजापत, हिराराम/खरथाराम जी बैनिवाल , भोलाराम/भैराराम जी थोरी ,नरसिगारामजी जाखड़, पोलाराम बैनिवाल, मोहनराम जाखड़, अशोक बैनिवाल , भैराराम लोल, खेराजराम/ कोहलाराम जी धतरवाल,भुराराम/रेखारामजी धतरवाल, कुम्भाराम(हुकमाराम)/ पेमाराम जी धतरवाल, नरपत/जेठाराम जी धतरवाल, तगाराम/जैठाराम, व ग्रामवासी मौजूद रहे
3. कलजी के पर्चे
1. ढिकाई मन्दिर के द्वार खुलवाए
2. गांव खटटु में गोगाजी मन्दिर पर मेले का आयोजन चालु करवाया ! जिसमें आज भी कलजी के वंशजों के हाथों से भादवा सुदी अष्टमी को मन्दिर के द्वार, नेजा, नगारा, आदि काम किया जाता है !
3. कलजी धतरवाल के स्वर्गवास से 100 साल बाद खट्टू से रामचन्द्र जी डऊकिया व पेमाराम जी मेघवाल खटटु से ढिकाई पैदल गए तब वहा मन्दिर पर भील समाज का एक व्यक्ति मिला जिससे कुछ समय तक बातचित हुईं और रामचंद्र जी डऊकिया ने कलजी धतरवाल के बारे में बताया तो भील समाज के व्यक्ति ने कहा इतने बड़े सेवक कलजी थे तों मुझे पोता देंदे तों मैं मान लु कि पके सेवक थे ! तभी पेमाराम मेघवाल कों छाया आई तों रामचंद्र जी डऊकिया ने कहा एक नारेल लाके चढ़ा दो ! वह व्यक्ति नारेल लाकर चढ़ा दिया! पेमाराम जी ने कहां तेरे नव महिनें से पोता होंगा ! फिर रामचंद्र जी व पेमाराम जी वापस खट्टू आ गए नव महिनें बाद उस व्यक्ति के पोता हुआ तो वह व्यक्ति उम्मेदनगर से खट्टू तों गांव के लोगों से पुछा कि पेमाराम जी मेघवाल भोपाजी का घर कहा पर हैं तों लोगों ने कहा पेमाराम जी जाट नाम का भोपा जी हैं पर पेमाराम मेघवाल नाम का भोपा नहीं है ! तब उस व्यक्ति ने कहा रामचंद्र जी है खट्टू में तब कहा हां रामचंद्र जी भोपा जी हैं खट्टू में !
तब वह व्यक्ति रामचंद्र जी के घर गया मिला तब कहा रामचंद्र जी अब कहां हैं भोपाजी पेमाराम जी मेघवाल तब रामचंद्र जी ने कहा वो कोई भोपा नहीं है आपने कहां था कि इतने बड़े कलजी सेवक थे तों मुझे पोता देंदे तब कलजी के नाम पर लांछन न लगें इसलिए पेमाराम जी मेघवाल कों छाया आई और आपकों पोते का आशीर्वाद दें दिया आपके पोता हों गया! तब वह व्यक्ति बोला कि कलजी कों नारेल चढ़ाना हैं! तब रामचंद्र जी ने कहा कलजी का कोई स्थान नहीं है आप इस नारेल को ढिकाई पर चढ़ा देना !
4. फोटो
8. फोटो
2. पिलानी थान गोगाजी मन्दिर खट्टू
3. जुना धाम जुनकी ढाणी गोगाजी व रामदेवजी थान
4. कला बाबा मन्दिर
5. कला बाबा मुर्ति
6. कलजी धतरवाल के परिवार का ग्रुप फोटो
7.
8.
5. खेतासर से खट्टू के सफर का कारण
जोधपुर जिले की ओसियां तहसील के खेतासर गांव में नेता जी धतरवाल व मुडेल प्रजापत परिवार पास - पास में रहते थे ! नेताजी धतरवाल के 4 पुत्र हुए जीवणजी आसुजी ( आयोजी), हिरोजी, मोटाजी
नेताजी धतरवाल के पुत्र आसु जी ( आयोजी ) का परिवार बाड़मेर के बायतु में आ कर बसे जबकि जीवणजी के एक पुत्र मेहराजरामजी हुए मेहराजरामजी के 4 पुत्र दूदाजी, जगमालाराम जी, भारमलरामजी, श्याम जी हुए ! दुदाजी का परिवार खेतासर में ही रहा भारमलजी का परिवार खट्टू में आ गया श्याम जी का परिवार खट्टू में आ कर के बचा कुछ परिवार दिनगढ (आलमसर) चला गया ! जगमालाराम जी के 4 पुत्र हुए अणदोणी का परिवार खेतासर में ही रहा जैयाजी का परिवार भी खेतासर में रहा साईंराम जी का परिवार भी खेतासर में ही रहा मगाराम जी खट्टू आ गए !
भुराराम जी प्रजापत व मगाराम जी धतरवाल खटटु आ गए ! आने का कारण ! उस समय किसान खेती करता तों हासल चुकानी पड़ती थी हासल चुकाने से पहले किसान अन्न का उपयोग नहीं कर सकता था ! भुराराम जी प्रजापत के घर पिछले साल का अन्न खत्म हो चुका था इस साल की हासल चुकानी बाकी थी तों भुराराम जी की पत्नी ने इसी साल के अन्न कों निकालकर पिछना चालु किया तों किसी ने बता दिया कि प्रजापतो के घर पर अनाज इस साल का पिछा जा रहा है !
तों राजा साहब ने आदेश दिया कि जाओ पता करके आओ कि अनाज इस साल का है या पिछले साल का है साथ में मुठी भरकर लाना तो एक व्यक्ति ने हां भरा की मै लेकर आजाऊगा !
आधी रात को वह व्यक्ति भुराराम जी प्रजापत के घर पहुंचा तो देखा कि अनाज पिछा जा रहा है !
उसने छोचा में अनाज मागुगा तों मना करेंगे चुपके से मुट्ठी भर ले | जैसे ही उसने मुट्ठी भरी तों महिला ने दरवाजा बन्द कर दिया उस व्यक्ति का एक हाथ व सिर अन्दर रह गया और दुसरा हाथ व बाकी शरीर बाहर रह गया ! उस महिला ने जब तक नहीं छोड़ा जब उसके पास रखें बर्तन का सारा अनाज पिछा गया ! अनाज पिछकर देखा तो व्यक्ति मर सुका था महिला भागकर अपने पति भुराराम जी के पास गईं और बोलीं राजा साहब के आदमी को मार दिया ! भुराराम जी दोड़कर जगमालाराम जी धतरवाल के पास गए और पुरी घटना सुनाई !
तब जगमालाराम जी ने कहा चिन्ता करने की कोई बात नहीं तुम घर जाओ और उस मृत व्यक्ति पर कचरा डाल दो शाम को कोई विचार करेंगे !
जगमालाराम जी ने अपने बेटे मगाराम जी को कहा भुराराम जी प्रजापत के साथ तुम मालाणी चलें जाओ मगाराम जी ने हामी भर दी ! शाम हुई तो भुराराम जी प्रजापत वापस जगमालाराम जी के पास आए और कहा शाम हो गई ! जगमालाराम जी ने कहा भुरा तु और मगो मालाणी देश चलें जाओ ! मगजी व भुराजी मालाणी के खटटु गांव में आ गए ! दोनों परिवार आपस में भाईयों तरह रहें आज भी मगाजी धतरवाल व भुराजी प्रजापत का परिवार आपस में भाई की तरह व्यवहार रखते हैं
शादी समारोह, सामाजिक कार्यक्रम में भाईयों की तरह रहते हैं ! मगाराम जी धतरवाल का परिवार खट्टू व पोकरासर,नेतडियार में निवासरत है भुराराम जी प्रजापत का परिवार खट्टू , खारा में निवासरत है
6. दर्शन दिए !
7. भजन
भजन कलजी धतरवाल
भजन
(1). कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे ........!
कळा कंवरजी थारी!
(2). कंवर मिळिया घोड़े सडीया , कवल किना हद भारी री रे....!
कळा कंवरजी थारी!
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.........!
कळा कंवरजी थारी!
(3). देवल आगे आय खड़ा, ताळा ज्डया हद भारी रे !
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(4). किया देश रा कहीजो मोनवी , किया गांव सु आया रे........!
कळा कंवरजी थारी !
(5). मरुधर देश मालोणी कहीजै, गांव खट्टू सु आया रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(6). काई तुम्हारा नाम कहीजे, किया देव ने धाया रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
(7). कलोजी मारो नाम कहीजे, धर्मी राजा ने धाया रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(8). ताळा जड़ ने चडया पावटीये, किना ताजणा त्यारी रे ....…..!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(9). खरो पको री लेऊ पारखा पड़े ताजणा भारी रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(10). देवळ आगे दृष्टि दिनि कंवर मेडि मोहि रे .......!
कळा कंवरजी थारी !
(11). कले री अरदास सुणी कियो घोड़ों त्यारी रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(12). कलो तो अरदास करें है लाज राखजो मारी रे.....!
कळा कंवरजी थारी !
(13). दोय प्रखमा कले दीनी तीजी ताळा तुटया रे .......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(14). चार प्रखमा पुरी हुई कलो मिन्दरो मोही रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(15). चतर ताजणो रा वासग वणीया परचा दिया हद भारी रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(16). हाथ जोड़ हजारी बोल्यो एडी मैं नहीं जोणी रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(17). गरु चरणे प्रजापत बोलै मैमा आपरी गाई है......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे ........!
कळा कंवरजी थारी!
पुस्तक लेखक - भीखाराम भोमाराम जी धतरवाल खटटु
सहयोगी - जोगाराम जी सारण