भजन कलजी धतरवाल
भजन
(1). कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे ........!
कळा कंवरजी थारी!
(2). कंवर मिळिया घोड़े सडीया , कवल किना हद भारी री रे....!
कळा कंवरजी थारी!
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.........!
कळा कंवरजी थारी!
(3). देवल आगे आय खड़ा, ताळा ज्डया हद भारी रे !
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(4). किया देश रा कहीजो मोनवी , किया गांव सु आया रे........!
कळा कंवरजी थारी !
(5). मरुधर देश मालोणी कहीजै, गांव खट्टू सु आया रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(6). काई तुम्हारा नाम कहीजे, किया देव ने धाया रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
(7). कलोजी मारो नाम कहीजे, धर्मी राजा ने धाया रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(8). ताळा जड़ ने चडया पावटीये, किना ताजणा त्यारी रे ....…..!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(9). खरो पको री लेऊ पारखा पड़े ताजणा भारी रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(10). देवळ आगे दृष्टि दिनि कंवर मेडि मोहि रे .......!
कळा कंवरजी थारी !
(11). कले री अरदास सुणी कियो घोड़ों त्यारी रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(12). कलो तो अरदास करें है लाज राखजो मारी रे.....!
कळा कंवरजी थारी !
(13). दोय प्रखमा कले दीनी तीजी ताळा तुटया रे .......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(14). चार प्रखमा पुरी हुई कलो मिन्दरो मोही रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(15). चतर ताजणो रा वासग वणीया परचा दिया हद भारी रे......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(16). हाथ जोड़ हजारी बोल्यो एडी मैं नहीं जोणी रे.......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे.....…!
कळा कंवरजी थारी !
(17). गरु चरणे प्रजापत बोलै मैमा आपरी गाई है......!
कळा कंवरजी थारी !
कले जाट ने वासग मिळिया वासग मिणधारी रे ........!
कळा कंवरजी थारी!
लेखक - भीखाराम भोमाराम जी धतरवाल खटटु